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जानिए इस लड़के ने पाँच बार असफल होने के बाद कैसे की IBPS PO 2018 की EXAM में टॉप। IBPS PO success story | Banking success story in Hindi

Bank po success story in hindi

नमस्कार दोस्तों abhinandantalk.com पर आपका स्वागत है ,,मेरा नाम अभिनन्दन है आज मैं आपको एक ऐसे टॉपर की कहानी बताने जा रहा हु  जिन्होंने विभिन्न बैंक परीक्षाएं दी हैं,उदाहरण के लिए, आईबीपीएस पीओ,आईबीपीएस क्लर्क,और भी कई सारी  परीक्षाएँ।लेकिन इससे पहले उनको भी बहुत सारी असफलताओं का सामना भी करना पड़ा है ,आपकी विफलता , सफलता के लिए एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है ,इसीलिए हमे कभी अपनी असफलता से घबराना नहीं चाहिए। IBPS PO 2018 के टॉपर अंशुल शुक्ला की कहानी कुछ ऐसी ही है तो चलिए जानते है उनके success story hindi me .
IBPS PO SUCCESS STORY

अंशुल शुक्ला की IBPS PO की JOURNEY 

अंशुल शुक्ला की एग्जाम की जर्नी 2017 से शुरू हुई ,उनकी पहली competitive exam RBI CLERK का था जिसमे वे नाम मात्र अंक से असफल रहे इस परीक्षा में मात्र दो या ढ़ाई अंक के लिए छटे थे। आरआरबी पीओ के लिए उनकी  दूसरी परीक्षा थी जो की असफल  था.इसके बाद उनकी तीसरी परीक्षा आईबीपीएस पीओ के लिए था यह वर्ष की सबसे बड़ी परीक्षा थी,जिसमे इन्होने प्रीलिम्स को तो क्रैक कर लिए लेकिन MAINS को नहीं निकाल पाए। इसके बाद इनकी चौथी परीक्षा ओरिएंटल की एक बीमा परीक्षा थी इसमें भी इन्होने प्रीलिम्स तो क्लियर कर लिए लेकिन MAINS को नहीं निकाल पाए। 

अंशुल शुक्ला की बार-बार असफल होने पर इनके अंदर आत्मविश्वास की कमी होना आम बात है ,अक्सर ऐसा सभी के साथ होता है की आपको जब बार बार असफलता मिलती है तो आपके अंदर आत्मविश्वास की कमी होने लगती है और  संतुलन खो देते है ,लेकिन अंशुल शुक्ला का मानना है की असफलता आपकी सफलता की कुंजी है इसीलिए असफलता से घबराने की जगह उनसे कुछ सीखना बेहतर होता है ,इसी को देखते हुए उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी आगे की तैयारी जारी रखी। 

इसके बाद उन्होंने अपनी पांचवी परीक्षा  सिंडिकेट बैंक, जनवरी 2018 के लिए थी इसमें मूल रूप से कोई प्रीलिम्स नहीं थी केवल प्रत्यक्ष मुख्य परीक्षा थी इसमें उनका अंतिम चयन असफल रहा वो भी केवल 0.5 अंक के लिए। इसके बाद उनकी अगली परीक्षा कनाडा बैंक पीओ की परीक्षा थी ये  असफल रही। लेकिन इनके इन सभी असफलताओ में केवल थोड़े बहुत अंको का ही फासला था जिसके कारण इनको आत्मविश्वास मिला और इन्होने इन सभी असफलताओ के बाद एक नयी जोश के साथ एक बार फिर से तयारी शुरू कर दी। 

इनकी अगली परीक्षा जून में थी जिससे की इनको तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय मिल गया। जून में अगली परीक्षा एसबीआई पीओ के लिए थी जिसमे इन्होने प्रीलिम्स क्लीयर किया और मेन्स भी अच्छे आए लेकिन वर्णनात्मक हिस्सा में कम अंक मिलने के कारण इस बार भी इनको  नहीं चुना गया। लेकिन इनको अब आत्मविश्वास हो गया था की अब अगली बार वे जरूर क्लियर कर लेंगे ,और हुआ कुछ ऐसा ही। यह इनका अंतिम और आखरी असफल परीक्षा थी। 

इसके बाद इन्होने अगली परीक्षा दी और उनको  सिपाही में आरआरबी पीओ में चयन किया  ,RRB CLERK के लिए चयनित किये गए ,और भी ढेर सारे एग्जाम में इनका चयन होता गया जैसे न्यू इंडिया एश्योरेंस के लिए भी चुना गये ,आवंटित बैंक ऑफ इंडिया और फाइनली IBPS PO के लिए चयनित किये गए। 


दोस्तों हम सभी ने देखा की अंशुल को बहुत सारी असफलताओ का सामना करना पड़ा। ऐसी स्थिति में खुद को मोटिवेटेड रखना बहुत जरुरी होता है ,,तो चलिए जानते है की अंशुल शुक्ला ने कैसे खुद को मोटीवेट किया। 

अंशुल शुक्ला का मानना है की जब आपको बार-बार असफलता का सामना करना पड़ रहा होता है तो ऐसी स्थिति में आपका नैतिकता और विस्वास दोनों बहुत कम हो जाता है। तब आपको अपने धैर्य को बनाये रखना होता है और फिर सबकुछ भूलकर दो या तीन दिन बाद फिर से एक अच्छी शुरुआत करनी चाहिए।और ये अपने माइंड में बिलकुल ना रखे की इतना कम्पटीशन है होगा या नहीं। बस तैयारी जारी रखे। दोस्तो आपको यह पोस्ट कैसा लगा कमेंट बॉक्स में जरूर बताये।  


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