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Anubhav dubey success story | Chai sutta bar success story in hindi |

Anubhav dubey biography in hindi 

आज के इस  आर्टिकल में हमलोग एक ऐसे लड़के की सक्सेस स्टोरी को जानेंगे जिसने अपनी upsc की तैयारी छोड़ बिना अपने घरवालों को बताये हुए चुपके से अपने दोस्त के कहने पर चाय बेचने का काम शुरू किया और मात्र सिक्स मंथ में उसने अपने आप को एक सक्सेस्स्फूल लोगो की लाइन में ला खड़े हुए। और आज उनके ब्रांच विदेशो में भी  है। आज उनके यहाँ 1500 से ज्यादा लोगो को  रोजगार मिला  है। आपको जानकर आश्चर्य होगा की आज उनका चाय का बिज़नेस 100 करोड़ से भी अधिक का आय अर्जित करता है। 
Chai sutta bar success story in hindi

    Who is Anubhav Dubey 

    अनुभव दुबे चाय सुट्टा बार के फाउंडर है। अनुभव दुबे का जन्म मध्य प्रदेश के रीवा शहर में एक माध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा मतलब आठवीं तक महर्षि विद्या मंदिर  से हुई और आगे की पढाई के लिए वे इंदौर चले गए। वहां जाने के बाद उनके कुछ दोस्त बने और वे उनके साथ रहने लगे और वही से उनके अंदर बिज़नेस का कीड़ा दौड़ने लगा  था। फिर वही से उन्होंने अपने एक दोस्त के कहने से चाय सुट्टा बार की शुरुआत हुई। 

    Who is owner of chai sutta bar 

    अनुभव दुबे जब इंदौर रहा करते थे तब उनका एक दोस्त था आनंद नायक जिसने अपने जीजू के साथ मिलकर अपना बिज़नेस स्टार्ट कर लिया था। तब अनुभव दुबे उस समय upsc की तैयारी के लिए दिल्ली गए हुए थे वही पर अचानक से एक दिन उनके दोस्त का कॉल आया उसने कहा की अपना बिज़नेस कुछ अच्छा नहीं चल रहा है। फिर चलो हम दोनों अपने कॉलेज के आईडिया से साथ मिलकर बिज़नेस करते है और वो भी चाय का बिज़नेस और वही से चाय सुट्टा बार की स्थापना हुई। अतः चाय सुट्टा बार के owner आनंद नायक और अनुभव दुबे है। 

    Chai sutta bar success journey 

    जैसा की आप सभी जान चुके होंगे की अनुभव दुबे की आठवीं तक की पढाई पूरी होने के बाद उनके पिताजी ने उन्हें आगे की पढाई के लिए इंदौर शहर भेज दिया जहाँ जाने के बाद उनके एक दोस्त बने आनंद नायक जो साथ रहते थे और खूब मौज मस्ती करते थे। उस समय उनके पास स्मार्टफोन नहीं हुआ करता था ,लेकिन इनलोगो को मोबाइल चलाने का बहुत शौक था। 


    और मोबाइल चलाने में किसको आनंद नहीं आता है ,इसके लिए वे अपने सभी दोस्तों के पॉकेट मनी को तसीलकर पैसा जुटाते थे और पास के एक बाजार जहाँ सभी सेकेंड हैंड सामान मिलता था से सभी दोस्त  मिलकर एक मोबाइल खरीदते और सभी लोग बारी बारी से उसे चलाते और चलाने के बाद उस मोबाइल को उसी बाजार के बाहर जाकर बेच देते थे जिससे उनको दुगना लाभ होता था पहला तो उन सभी को मोबाइल चलाने को मिल जाता था और पैसे भी वापस आ जाते थे और दूसरा की उनको कुछ लाभ भी मिल जाता था। 


    इस तरह अनुभव और आनंद ने देखा की यह तो अच्छा है हमे लाभ भी मिल जाता है और हमारा काम भी हो जाता है। तब से उनके दिमाग में एक बात आयी की उन्हें तो अब सिर्फ बिज़नेस ही करना है। इसके बाद आनंद नायक ने अपने जीजू के साथ मिलकर बिज़नेस शुरू कर दिया। और अनुभव के माता-पिता उसे पढ़ने और एक अच्छा ऑफिसर बनने के लिए दिल्ली भेज दिया। 

    दिल्ली जाने के बाद अनुभव दुबे UPSC की तैयारी करने लगे। इसी कुछ दिन बाद इनके पास आनंद का अचानक कॉल आया और उसने कहा की यार अपना बिज़नेस कुछ अच्छा नहीं चल रहा है। तो अब हम लोग अपने कॉलेज वाले आईडिया को अपनाते है और फिर से अपना एक बिज़नेस शुरू करते है ,और वो भी चाय का बिज़नेस। 

    इसके बाद अनुभव ने बिना कुछ सोचे और  घरवाले को बताये ,अपने दोस्त के साथ चल दिए। उस समय उन दोनों के पास कुल तीन लाख रूपए थे। उस तीन लाख रुपये को लेकर उन्होंने अपनी चाय के बिज़नेस के लिए चल दिए। सबसे पहले उन्होंने जगह का चयन किया जहाँ अधिक से अधिक लोग जुटते हो। इसलिए उन्होंने एक गर्ल हॉस्टल का चयन किया जहाँ एक रूम लेकर उसका सेटअप करने लगे। गर्ल हॉस्टल के पास होने से ग्राहक खुद से आ जाने के चांस अधिक थे। 

    सेटअप के दौरान जब उन्हें लगा की अब पैसे कम पड़ जायेंगे तब उन्होंने खुद से काम करना शुरू कर दिया और जो लेबर का काम होता था वे खुद ही करने लगे। सेटअप करते करते उनका सारा पैसा समाप्त हो गया ,उनके पास इतना पैसा नहीं था की वे अपने बिज़नेस का प्रचार प्रसार कर सके। इसीलिए उन्होंने अपने दोस्तों से मदद ली और उन्हें अपने दूकान पर invite किया ,जिससे फायदा ये हुआ की लोग भीड़ देखकर चाय पिने आने लगे। 

    और वे अपने दुकान की प्रचार खुद से ही करते थे और इनके प्रचार करने का तरीका कुछ अलग था ,वे जब भी किसी मॉल,पार्टी या किसी भीड़ -भाड़ वाले जगह पर जाते तो वो आपस में अपनी ही दुकान  चर्चा करते थे। इससे लोग चाय सुट्टा तक पहुंच जाते थे। और उनकी मेहनत रंग लायी और छह महीने के अंदर ही उनका चाय सुट्टा बार फेमस हो गया। 

    चाय सुट्टा फेमस होने के बाद उन्होंने फेसबुक पर अपनी लाइव मीटिंग कर रहे थे तभी उनके एक रिस्तेदार ने वो वीडियो देख लिया और जाकर अनुभव के घरवाले को बोल दिया की आपका बेटा कोई UPSC की तैयारी नहीं करता बल्कि चाय बेचता है। इसके बाद उनके पिताजी चाय सुट्टा बार पर आये, देखा और बिना कुछ बोले वापस चले गए। इसके बाद धीरे -धीरे इनकी  चर्चा न्यूज़ और सोशल मीडिया पर होने लगी। तब इनके घरवाले भी अब सपोर्ट करने लगे। 

    Anubhav Dubey net worth

    जिसका परिणाम ये हुआ की मात्र तीन सालो में चाय सुट्टा बार 100 करोड़ का बिज़नेस बन गया ,और आज Chai Sutta Bar एक अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड है जो दुनिया भर में देसी कुल्हड़ चाय की सुगंध को फैलाने में गर्व करता है। आज यह 30+ अंतरराष्ट्रीय शहरों में 75+ आउटलेट के साथ देश का नाम रौशन कर रहा है।


    इस पोस्ट में हमने जाना की हमे अपने पैशन को धैर्य बनाकर फॉलो करना चाहिए। यदि आप अपने पैशन को फॉलो कर रहे है और आपके अंदर धैर्य और लगातार काम करने की आदत नहीं है तो आप कभी सफल नहीं हो सकते। इसीलिए पैशन को फॉलो करे और धैर्य बनाकर सही दिशा में काम करे। 

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